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श्लोक  12.333.22 
शशंसुर्ऋषयस्तत्र कर्म पुत्रस्य तत् तदा।
तत: शुकेति दीर्घेण शब्देनाक्रन्दितस्तदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहने वाले ऋषियों ने आकर व्यास को उनके पुत्र के इस असाधारण कार्य के बारे में बताया। तब व्यास जी शुकदेव का नाम लेकर फूट-फूट कर रोने लगे।
 
The sages living there came and told Vyasa about the extraordinary deed of his son. Then Vyasa took the name of Shukdev and wept loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)