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mahabharat 12.333.19-20h: उधर शुकदेव आकाश और वायु की ऊर्ध्व गति का आश्रय लेकर अपना प्रभाव दिखाकर तत्काल ब्रह्मभूत हो गये।   |   mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.333.19-20h 
शुकस्तु मारुतादूर्ध्वं गतिं कृत्वान्तरिक्षगाम्॥ १९॥
दर्शयित्वा प्रभावं स्वं ब्रह्मभूतोऽभवत् तदा।
 
 
अनुवाद
उधर शुकदेव आकाश और वायु की ऊर्ध्व गति का आश्रय लेकर अपना प्रभाव दिखाकर तत्काल ब्रह्मभूत हो गये।
 
On the other hand, Shukdev, after showing his influence by taking shelter in the sky and the vertical movement of the air, immediately became Brahmabhut.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)