Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.333.14-16h: महाराज! देवता, गन्धर्व, ऋषि, यक्ष, राक्षस और विद्याधरों ने उनकी पूजा की। जब शुकदेवजी वहाँ से ऊपर उठे, तो उनके द्वारा अर्पित दिव्य पुष्पों की वर्षा से सारा आकाश आच्छादित हो गया। | mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स पूज्यमानो देवैश्च गन्धर्वैर्ऋषिभिस्तथा॥ १४॥
यक्षराक्षससंघैश्च विद्याधरगणैस्तथा।
दिव्यै: पुष्पै: समाकीर्णमन्तरिक्षं समन्तत:॥ १५॥
आसीत् किल महाराज शुकाभिपतने तदा।
अनुवाद
महाराज! देवता, गन्धर्व, ऋषि, यक्ष, राक्षस और विद्याधरों ने उनकी पूजा की। जब शुकदेवजी वहाँ से ऊपर उठे, तो उनके द्वारा अर्पित दिव्य पुष्पों की वर्षा से सारा आकाश आच्छादित हो गया।
Maharaj! Gods, Gandharvas, Rishis, Yakshas, Demons and Vidyadhars worshipped him. When Shukdevji ascended from there, the entire sky was covered with the rain of divine flowers offered by him. 14-15 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥