Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.333.13-14h: भरत! शुकदेवजी को पर्वत लाँघकर आगे बढ़ते हुए तथा पर्वत को दो टुकड़ों में विभक्त होते देखकर सर्वत्र 'साधु-साधु' शब्द सुनाई देने लगे॥13 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वा शुकमतिक्रान्तं पर्वतं च द्विधाकृतम्॥ १३॥
साधु साध्विति तत्रासीन्नाद: सर्वत्र भारत।
अनुवाद
भरत! शुकदेवजी को पर्वत लाँघकर आगे बढ़ते हुए तथा पर्वत को दो टुकड़ों में विभक्त होते देखकर सर्वत्र 'साधु-साधु' शब्द सुनाई देने लगे॥13 1/2॥
Bharat! Seeing Shukdevji crossing the mountain and moving ahead and seeing the mountain being split into two pieces, the words 'Sadhu-Sadhu' were heard everywhere.॥ 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥