Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.332.3-4: कुछ समय पश्चात् जब सूर्य उदय हुआ, तब बुद्धिमान शुकदेवजी हाथ-पैर जोड़कर विनयपूर्वक पूर्वाभिमुख होकर योगाभ्यास में लग गए। उस समय जहाँ बुद्धिमान व्यासनन्दन योगाभ्यास कर रहे थे, वहाँ न तो पक्षियों का समुदाय था, न कोई शब्द सुनाई दे रहा था और न ही आँखों को आकर्षित करने वाला कोई दृश्य ही था। | mahabharat अध्याय 12.332: शुकदेवजीकी ऊर्ध्वगतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स प्राङ्मुखो विद्वानादित्ये नचिरोदिते।
पाणिपादं समादाय विनीतवदुपाविशत्॥ ३॥
न तत्र पक्षिसंघातो न शब्दो नातिदर्शनम्।
यत्र वैयासकिर्धीमान् योक्तुं समुपचक्रमे॥ ४॥
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् जब सूर्य उदय हुआ, तब बुद्धिमान शुकदेवजी हाथ-पैर जोड़कर विनयपूर्वक पूर्वाभिमुख होकर योगाभ्यास में लग गए। उस समय जहाँ बुद्धिमान व्यासनन्दन योगाभ्यास कर रहे थे, वहाँ न तो पक्षियों का समुदाय था, न कोई शब्द सुनाई दे रहा था और न ही आँखों को आकर्षित करने वाला कोई दृश्य ही था।
After some time, when the sun rose, the wise Shukdev folded his hands and legs and humbly sat facing east and engaged in yoga. At that time, where the wise Vyasanandan was practicing yoga, there was neither a community of birds, nor any sound to be heard, nor was there any sight that attracted the eyes. 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥