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mahabharat 12.332.18-19h: वह अपनी वाणी से सम्पूर्ण आकाश को भर रहा था। हे राजन! उसे अचानक आते देख सभी अप्सराएँ भयभीत हो गईं और उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 12.332: शुकदेवजीकी ऊर्ध्वगतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 332: शुकदेवजीकी ऊर्ध्वगतिका वर्णन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.332.18-19h 
शब्देनाकाशमखिलं पूरयन्निव सर्वश:।
तमापतन्तं सहसा दृष्ट्वा सर्वाप्सरोगणा:॥ १८॥
सम्भ्रान्तमनसो राजन्नासन् परमविस्मिता:।
 
 
अनुवाद
वह अपनी वाणी से सम्पूर्ण आकाश को भर रहा था। हे राजन! उसे अचानक आते देख सभी अप्सराएँ भयभीत हो गईं और उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ।
 
He was filling the entire sky with his voice. O King! Seeing him suddenly coming, all the Apsaras became frightened and were very surprised. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)