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श्लोक 12.331.9  |
योऽयमिच्छेद् यथाकामं कामानां तदवाप्नुयात्।
यदि स्यान्न पराधीनं पुरुषस्य क्रियाफलम्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| यदि जीव के कर्मों का फल दूसरों पर आश्रित न होता, तो जो कुछ चाहता, उसे उसकी रुचि के अनुसार इच्छित वस्तु मिल जाती ॥9॥ |
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| If the results of the actions of a living being were not dependent on others, then whoever desired something would get what he desired according to his interest. ॥9॥ |
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