श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.331.8 
अदृष्टपूर्वानादाय भावानपरिशङ्कितान्।
इष्टानिष्टान् मनुष्याणामस्तं गच्छन्ति रात्रय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ये रात्रियाँ आती-जाती रहती हैं और अपने साथ मनुष्यों के लिए अनेक अप्रत्याशित तथा सुखद-अप्रिय घटनाएँ लेकर आती हैं ॥8॥
 
These nights come and go, bringing with them many unexpected and pleasant and unpleasant events for human beings. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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