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श्लोक 12.331.65  |
पितरं सम्परित्यज्य जगाम मुनिसत्तम:।
कैलासपृष्ठं विपुलं सिद्धसंघनिषेवितम्॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| अपने पिता को वहीं छोड़कर महर्षि शुकदेव सिद्ध समुदाय द्वारा सेवित विशाल कैलाश शिखर पर चले गये। |
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| Leaving his father there, the great sage Shukdev went to the huge Kailash peak served by the Siddha community. |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकाभिगमने एकत्रिंशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका प्रस्थानविषयक तीन सौ इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३१॥
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