श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.331.6 
व्यत्ययो ह्ययमत्यन्तं पक्षयो: शुक्लकृष्णयो:।
जातान् मर्त्यान् जरयति निमेषान् नावतिष्ठते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का यह निरन्तर परिवर्तन मनुष्यों को थका रहा है। इसे क्षण भर भी विश्राम नहीं मिलता ॥6॥
 
This constant change of the bright and dark fortnights is wearing out the human beings. It does not rest even for a few moments. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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