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श्लोक 12.331.53  |
तस्माद् योगं समास्थाय त्यक्त्वा गृहकलेवरम्।
वायुभूत: प्रवेक्ष्यामि तेजोराशिं दिवाकरम्॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| अतः मैं योग का आश्रय लेकर इस शरीर को त्यागकर वायु रूप में सूर्यमण्डल में प्रवेश करूँगा ॥53॥ |
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| Therefore, I will take the shelter of yoga and leave this body and will enter the solar system in the form of air. 53॥ |
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