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mahabharat 12.331.45: हे महामुनि! मैंने आपसे यह अत्यन्त गम्भीर बात कही है, जिसके कारण देवतागण मृत्युलोक छोड़कर स्वर्गलोक को चले गए हैं॥45॥   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.331.45 
एतत् ते परमं गुह्यमाख्यातमृषिसत्तम।
येन देवा: परित्यज्य मर्त्यलोकं दिवं गता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! मैंने आपसे यह अत्यन्त गम्भीर बात कही है, जिसके कारण देवतागण मृत्युलोक छोड़कर स्वर्गलोक को चले गए हैं॥45॥
 
O great sage! I have told you this extremely profound matter, due to which the gods left the mortal world and went to heaven. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)