श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.331.44 
त्यज धर्ममधर्मं च उभे सत्यानृते त्यज।
उभे सत्यानृते त्यक्त्वा येन त्यजसि तं त्यज॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
धर्म और अधर्म को छोड़ दो। सत्य और असत्य दोनों को त्याग दो। सत्य और असत्य दोनों को त्यागकर, जो अहंकार तुम त्यागते हो, उसे भी त्याग दो। 44॥
 
Leave religion and unrighteousness. Abandon both truth and falsehood. By giving up both truth and untruth, give up the ego which you give up. 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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