श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.331.42 
सर्वेषामृद्धिकामानामन्ये रथपुर:सरा:।
मनुष्याश्च गतस्त्रीका: शतशो विविधस्त्रिय:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
सभी मनुष्य धन और समृद्धि की कामना करते हैं; परन्तु उनमें से कुछ ही रथों पर यात्रा करते हैं। बहुत से पुरुष बिना पत्नियों के हैं और सैकड़ों पुरुषों की अनेक पत्नियाँ हैं।
 
All men desire wealth and prosperity; but only a few of them travel in chariots. Many men are without wives and hundreds of men have many wives.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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