Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.28: आत्मा अनादि काल से साथ-साथ जन्म लेने वाले शरीर के साथ अपना संबंध स्थापित करती है। इस शरीर की दस अवस्थाएँ हैं - गर्भ, जन्म, बाल्यावस्था, युवावस्था, किशोरवय, युवावस्था, वृद्धावस्था, वृद्धावस्था, मृत्यु और मरण। इनमें से सातवीं और नौवीं दशाओं में भी शरीर में स्थित पाँच भूत ही प्राप्त होते हैं, आत्मा नहीं। जीवन के अंत में और जब शरीर नौवीं अवस्था में पहुँच जाता है, तब इन पाँचों भूतों का अस्तित्व नहीं रहता। अर्थात् वे दसवीं दशा को प्राप्त होते हैं। 28॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तस्य सहजातस्य सप्तमीं नवमीं दशाम्।
प्राप्नुवन्ति तत: पञ्च न भवन्ति गतायुष:॥ २८॥
अनुवाद
आत्मा अनादि काल से साथ-साथ जन्म लेने वाले शरीर के साथ अपना संबंध स्थापित करती है। इस शरीर की दस अवस्थाएँ हैं - गर्भ, जन्म, बाल्यावस्था, युवावस्था, किशोरवय, युवावस्था, वृद्धावस्था, वृद्धावस्था, मृत्यु और मरण। इनमें से सातवीं और नौवीं दशाओं में भी शरीर में स्थित पाँच भूत ही प्राप्त होते हैं, आत्मा नहीं। जीवन के अंत में और जब शरीर नौवीं अवस्था में पहुँच जाता है, तब इन पाँचों भूतों का अस्तित्व नहीं रहता। अर्थात् वे दसवीं दशा को प्राप्त होते हैं। 28॥
The soul establishes its relationship with the body that was born together from time immemorial. This body has ten states - pregnancy, birth, childhood, youth, adolescence, youth, old age, old age, death and death. Out of these, the seventh and ninth dashas also get only the five ghosts in the body and not the soul. At the end of life and when the body reaches the ninth state, these five ghosts no longer exist. That is, they attain the tenth dasha. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥