श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.331.24 
अन्नपानानि जीर्यन्ते यत्र भक्षाश्च भक्षिता:।
तस्मिन्नेवोदरे गर्भ: किं नान्नमिव जीर्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जहाँ ग्रहण किया गया भोजन और जल पच जाता है तथा सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ पच जाते हैं, वहीं पेट में पड़ा भ्रूण भोजन की तरह क्यों नहीं पचता?
 
Where the food and water consumed are digested and all types of edible items are digested, why is the fetus lying in the stomach not digested like food?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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