श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.331.20 
अन्योन्यं समभिप्रेत्य मैथुनस्य समागमे।
उपद्रव इवाविष्टो योनिं गर्भ: प्रपद्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब पति-पत्नी अपनी-अपनी इच्छा के अनुसार मैथुन के लिए एक साथ आते हैं, तब गर्भ योनि में विघ्न की तरह प्रवेश करता है ॥20॥
 
When the husband and wife come together for sexual intercourse as per their mutual desire, the fetus enters the vagina like a disturbance. ॥20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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