श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.331.15 
तस्य योनौ प्रयुक्तस्य गर्भो भवति वा न वा।
आम्रपुष्पोपमा यस्य निवृत्तिरुपलभ्यते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कभी योनि में पहुँचकर वह गर्भ धारण कर लेती है, कभी नहीं; और कभी आम के बौरों के समान व्यर्थ ही गिर जाती है ॥15॥
 
Sometimes, after reaching the vagina, it is able to conceive, sometimes not; and sometimes, like the blossoms of a mango, it falls away in vain. ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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