श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.331.11 
अपरे बालिशा: सन्तो निर्गुणा: पुरुषाधमा:।
आशीर्भिरप्यसंयुक्ता दृश्यन्ते सर्वकामिन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तथापि अन्य मूर्ख, गुणहीन और नीच पुरुष भी किसी का आशीर्वाद न पाकर भी समस्त कामनाओं से युक्त दिखाई देते हैं ॥11॥
 
However, other foolish, virtueless and mean men too appear to be blessed with all the desires despite not receiving anyone's blessings. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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