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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश
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श्लोक 8
श्लोक
12.330.8
गुणैर्भूतानि युज्यन्ते वियुज्यन्ते तथैव च।
सर्वाणि नैतदेकस्य शोकस्थानं हि विद्यते॥ ८॥
अनुवाद
सब प्राणियों को अच्छी वस्तुओं से संयोग और वियोग होता रहता है। ऐसा नहीं है कि यह दुःख का अवसर केवल एक ही व्यक्ति पर पड़ता है ॥8॥
All beings keep getting union and separation from good things. It is not the case that this occasion of grief falls only on one person. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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