Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.330.7: जो मनुष्य भूतकाल के लिए शोक करता है, उसे न तो धन, न धर्म और न ही यश की प्राप्ति होती है। वह केवल इन वस्तुओं का अभाव अनुभव करके दुःखी होता है। इससे अभाव दूर नहीं होता। ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नार्थो न धर्मो न यशो योऽतीतमनुशोचति।
अप्यभावेन युज्येत तच्चास्य न निवर्तते॥ ७॥
अनुवाद
जो मनुष्य भूतकाल के लिए शोक करता है, उसे न तो धन, न धर्म और न ही यश की प्राप्ति होती है। वह केवल इन वस्तुओं का अभाव अनुभव करके दुःखी होता है। इससे अभाव दूर नहीं होता। ॥7॥
He who mourns for the past attains neither wealth nor religion nor fame. He only suffers by feeling the lack of these things. This does not remove the lack. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥