श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.330.4 
अनिष्टसम्प्रयोगाच्च विप्रयोगात् प्रियस्य च।
मनुष्या मानसैर्दु:खैर्युज्यन्ते स्वल्पबुद्धय:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
केवल मंदबुद्धि लोग ही अप्रिय वस्तु मिलने पर या किसी प्रियजन को खो देने पर दुःखी होते हैं ॥4॥
 
Only dull-witted people become saddened when they get an unpleasant thing or lose a loved one. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)