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mahabharat 12.330.25: परन्तु दुःख से मुक्ति का उपाय तो सभी को सोचना ही चाहिए। जो दुःख को त्यागकर साधना आरम्भ करता है और किसी व्यसन में नहीं पड़ता, वह दुःखों से अवश्य मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.330.25 
तथाप्युपायं सम्पश्येद् दु:खस्य परिमोक्षणम्।
अशोचन् नारभेच्चैव मुक्तश्चाव्यसनी भवेत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु दुःख से मुक्ति का उपाय तो सभी को सोचना ही चाहिए। जो दुःख को त्यागकर साधना आरम्भ करता है और किसी व्यसन में नहीं पड़ता, वह दुःखों से अवश्य मुक्त हो जाता है।
 
However, everyone must think of a way to get rid of sorrow. One who leaves sorrow and starts sadhana and does not get addicted to any addiction, he definitely gets free from sorrows. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)