Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.330.23: जो मनुष्य समस्त प्राणियों के भीतर मन से परे भगवान की स्थिति को जानते हैं और उसका चिंतन करते हैं, वे संसार यात्रा के अंत में दुःख से परे होकर परम गति का अनुभव करते हैं ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भूतेषु भावं संचिन्त्य ये बुद्ध्वा मनस: परम्।
न शोचन्ति गताध्वान: पश्यन्त: परमां गतिम्॥ २३॥
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त प्राणियों के भीतर मन से परे भगवान की स्थिति को जानते हैं और उसका चिंतन करते हैं, वे संसार यात्रा के अंत में दुःख से परे होकर परम गति का अनुभव करते हैं ॥23॥
Those people who know the state of God beyond the mind within all living beings and think about Him, after the end of their worldly journey, they go beyond grief and experience the supreme state. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥