Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.330.22: जीवन निरन्तर बीत रहा है। यह एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। जब हमारा शरीर ही अस्थायी है, तो इस संसार में कौन सी वस्तु स्थायी मानी जा सकती है? ॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निमेषमात्रमपि हि वयो गच्छन्न तिष्ठति।
स्वशरीरेष्वनित्येषु नित्यं किमनुचिन्तयेत्॥ २२॥
अनुवाद
जीवन निरन्तर बीत रहा है। यह एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। जब हमारा शरीर ही अस्थायी है, तो इस संसार में कौन सी वस्तु स्थायी मानी जा सकती है? ॥22॥
Life is passing by continuously. It does not stop even for a moment. When our body itself is temporary, then what thing in this world can be considered permanent? ॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥