श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.330.2 
शोकस्थानसहस्राणि भयस्थानशतानि च।
दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
दुःख के हजारों स्थान और भय के सैकड़ों स्थान हैं, जो प्रतिदिन केवल मूर्खों को ही प्रभावित करते हैं, विद्वानों को नहीं ॥2॥
 
There are thousands of places of grief and hundreds of places of fear, which every day affect only the foolish, not the learned. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)