Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.330.19: मनुष्य धन संचय करते रहते हैं और पहले से भी अधिक पद प्राप्त करने पर भी कभी संतुष्ट नहीं होते। वे और अधिक पाने की आशा में ही मर जाते हैं; परन्तु विद्वान् पुरुष सदैव संतुष्ट रहते हैं (वे धन के लोभ में नहीं पड़ते)।॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य धन संचय करते रहते हैं और पहले से भी अधिक पद प्राप्त करने पर भी कभी संतुष्ट नहीं होते। वे और अधिक पाने की आशा में ही मर जाते हैं; परन्तु विद्वान् पुरुष सदैव संतुष्ट रहते हैं (वे धन के लोभ में नहीं पड़ते)।॥19॥
Men keep on accumulating wealth and even after attaining a higher status than before, they are never satisfied. They die with the hope of getting more; but learned men are always satisfied (they do not fall prey to the greed for wealth).॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥