Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.330.18: धन के व्यय में महान दुःख है। उसकी रक्षा करने में कोई सुख नहीं है और वह बड़ी कठिनाई से प्राप्त भी होता है। इसलिए धन को हर स्थिति में दुःखदायी मानकर उसके नष्ट होने की चिंता नहीं करनी चाहिए ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्यज्यन्ते दु:खमर्था हि पालने न च ते सुखा:।
दु:खेन चाधिगम्यन्ते नाशमेषां न चिन्तयेत्॥ १८॥
अनुवाद
धन के व्यय में महान दुःख है। उसकी रक्षा करने में कोई सुख नहीं है और वह बड़ी कठिनाई से प्राप्त भी होता है। इसलिए धन को हर स्थिति में दुःखदायी मानकर उसके नष्ट होने की चिंता नहीं करनी चाहिए ॥18॥
There is great sorrow in spending money. There is no happiness in protecting it and it is also obtained with great difficulty. Therefore, considering money as painful in every situation, one should not worry about its loss. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥