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mahabharat 12.330.16: इसमें कोई संदेह नहीं कि जीवन में सुख की अपेक्षा दुःख अधिक है। परंतु आसक्ति के कारण सभी को भौतिक पदार्थों में रुचि होती है और मृत्यु अप्रिय लगती है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.330.16 
सुखाद् बहुतरं दु:खं जीविते नात्र संशय:।
स्निग्धत्वं चेन्द्रियार्थेषु मोहान्मरणमप्रियम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि जीवन में सुख की अपेक्षा दुःख अधिक है। परंतु आसक्ति के कारण सभी को भौतिक पदार्थों में रुचि होती है और मृत्यु अप्रिय लगती है॥16॥
 
There is no doubt that there is more sorrow than happiness in life. But due to attachment everyone has a fondness for material things and death seems unpleasant.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)