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mahabharat 12.330.15: सम्पूर्ण राष्ट्र पर आई हुई विपत्ति के लिए एक व्यक्ति का शोक करना उचित नहीं है। यदि विपत्ति को टालने का कोई उपाय दिखाई दे, तो शोक छोड़कर वैसा ही करना चाहिए॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.330.15 
न जानपदिकं दु:खमेक: शोचितुमर्हति।
अशोचन् प्रतिकुर्वीत यदि पश्येदुपक्रमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण राष्ट्र पर आई हुई विपत्ति के लिए एक व्यक्ति का शोक करना उचित नहीं है। यदि विपत्ति को टालने का कोई उपाय दिखाई दे, तो शोक छोड़कर वैसा ही करना चाहिए॥ 15॥
 
It is not right for one person to mourn for a calamity that has befallen the entire nation. If any means can be seen to avert the calamity, then one should leave the mourning and do that.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)