Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.330.14: रूप, यौवन, जीवन, धन, स्वास्थ्य और प्रियजनों का साथ - ये सब अनित्य हैं। विद्वान् पुरुष को इनमें आसक्त नहीं होना चाहिए ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 330: शुकदेवको नारदजीका सदाचार और अध्यात्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.330.14 
अनित्यं यौवनं रूपं जीवितं द्रव्यसंचय:।
आरोग्यं प्रियसंवासो गृध्येत् तत्र न पण्डित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रूप, यौवन, जीवन, धन, स्वास्थ्य और प्रियजनों का साथ - ये सब अनित्य हैं। विद्वान् पुरुष को इनमें आसक्त नहीं होना चाहिए ॥14॥
 
Beauty, youth, life, wealth, health and the company of loved ones - all these are temporary. A learned person should not be attached to them. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)