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mahabharat 12.33.9: वे सब युवतियाँ अपने पिता, भाई, पति और पुत्रों को न देखकर प्राण त्यागकर यमलोक को चली जाएँगी॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.33.9 
अपश्यन्त्य: पितॄन् भ्रातॄन् पतीन् पुत्रांश्च योषित:।
त्यक्त्वा प्राणान् स्त्रिय: सर्वा गमिष्यन्ति यमक्षयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वे सब युवतियाँ अपने पिता, भाई, पति और पुत्रों को न देखकर प्राण त्यागकर यमलोक को चली जाएँगी॥9॥
 
Not seeing their fathers, brothers, husbands and sons, all those young women will give up their lives and go to Yamaloka.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)