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mahabharat 12.33.7: आज उन सुन्दर स्त्रियों की क्या दशा होगी जो अपने पुत्रों, पतियों और भाइयों से सदा के लिए वियोगी हो गई हैं?॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.33.7 
का नु तासां वरस्त्रीणामवस्थाद्य भविष्यति।
विहीनानां तु तनयै: पतिभिर्भ्रातृभिस्तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
आज उन सुन्दर स्त्रियों की क्या दशा होगी जो अपने पुत्रों, पतियों और भाइयों से सदा के लिए वियोगी हो गई हैं?॥7॥
 
What will be the condition of those beautiful women today who are separated from their sons, husbands and brothers forever? ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)