Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.33.5-6: दादाजी! आज भी मैं इसी चिंता से बार-बार जल रहा हूँ। इस पृथ्वी को उन धनवान राजा सिंहों से रहित, बन्धु-बान्धवों का भीषण संहार, सैकड़ों अन्य लोगों का विनाश तथा करोड़ों अन्य मनुष्यों का वध देखकर मैं पूर्णतः व्यथित हूँ। | mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दादाजी! आज भी मैं इसी चिंता से बार-बार जल रहा हूँ। इस पृथ्वी को उन धनवान राजा सिंहों से रहित, बन्धु-बान्धवों का भीषण संहार, सैकड़ों अन्य लोगों का विनाश तथा करोड़ों अन्य मनुष्यों का वध देखकर मैं पूर्णतः व्यथित हूँ।
Grandfather! Even today I am burning with this worry again and again. I am completely distressed seeing this earth devoid of those wealthy king lions, the horrific slaughter of brothers and relatives, the destruction of hundreds of other people and the slaughter of crores of other humans.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥