श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.33.45 
कुमारो नास्ति येषां च कन्यास्तत्राभिषेचय।
कामाशयो हि स्त्रीवर्ग: शोकमेवं प्रहास्यसि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यदि राजाओं के पुत्र न हों, तो वे अपनी पुत्रियों को राजा बना दें। ऐसा करने से उनकी पत्नियों की इच्छाएँ पूरी होंगी और वे अपना शोक त्याग देंगी ॥45॥
 
If the kings have no sons, anoint their daughters as kings. By doing so, the desires of their wives will be fulfilled and they will give up their grief. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)