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mahabharat 12.33.44: जिनके उत्तराधिकारी बालक हैं अथवा गर्भ में हैं, उनकी प्रजा को तर्क और सान्त्वना देकर शान्त करो और समस्त प्रजा का सत्कार करते हुए इस पृथ्वी पर शासन करो ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.33.44 
बालानपि च गर्भस्थान् सान्त्वेन समुदाचरन्।
रञ्जयन् प्रकृती: सर्वा: परिपाहि वसुन्धराम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जिनके उत्तराधिकारी बालक हैं अथवा गर्भ में हैं, उनकी प्रजा को तर्क और सान्त्वना देकर शान्त करो और समस्त प्रजा का सत्कार करते हुए इस पृथ्वी पर शासन करो ॥ 44॥
 
Calm down the subjects of those whose heirs are either children or in the womb by reasoning and consoling them and rule this earth while entertaining all the subjects. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)