श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.33.43 
तेषां पुराणि राष्ट्राणि गत्वा राजन् सुहृद्‍वृत:।
भ्रातॄन् पुत्रांश्च पौत्रांश्च स्वे स्वे राज्येऽभिषेचय॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
राजा! अब तुम अपने मित्रों के साथ उनके देशों और नगरों में जाओ और उनके भाइयों, पुत्रों या पौत्रों को अपने-अपने राज्यों का राजा अभिषिक्त करो ॥ 43॥
 
King! Now go to their countries and cities along with your friends and anoint their brothers, sons or grandsons as kings of your respective kingdoms. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)