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mahabharat 12.33.42: हे अनघ! तुमने भी अपने पराक्रम से इस पृथ्वी को प्राप्त किया है और अपनी भुजाओं के बल से समस्त राजाओं को परास्त किया है।   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.33.42 
सेयं त्वामनुसम्प्राप्ता विक्रमेण वसुन्धरा।
निर्जिताश्च महीपाला विक्रमेण त्वयानघ॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे अनघ! तुमने भी अपने पराक्रम से इस पृथ्वी को प्राप्त किया है और अपनी भुजाओं के बल से समस्त राजाओं को परास्त किया है।
 
O Anagha! You too have obtained this earth by your prowess and defeated all kings by the strength of your arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)