Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.33.41: सभी देवता और महर्षि भी शचीपति देवराज इन्द्र की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा स्वर्ग में अप्सराएँ करती हैं ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.33.41 
स्वर्गे लोके महीयन्तमप्सरोभि: शचीपतिम्।
ऋषय: पर्युपासन्ते देवाश्च विबुधेश्वरम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
सभी देवता और महर्षि भी शचीपति देवराज इन्द्र की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा स्वर्ग में अप्सराएँ करती हैं ॥41॥
 
All the gods and Maharishis also worship Sachipati Devraj Indra, who is worshiped by the Apsaras in heaven. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)