श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  12.33.25-26 
इदं तु श्रूयते पार्थ युद्धे देवासुरे पुरा।
असुरा भ्रातरो ज्येष्ठा देवाश्चापि यवीयस:॥ २५॥
तेषामपि श्रीनिमित्तं महानासीत् समुच्छ्रय:।
युद्धं वर्षसहस्राणि द्वात्रिंशदभवत् किल॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! कहते हैं कि प्राचीन काल में देवताओं और दानवों के बीच युद्ध के समय बड़े भाई असुर और छोटे भाई देवता आपस में लड़े थे। राजलक्ष्मी के लिए उनके बीच बत्तीस हज़ार वर्षों तक घोर युद्ध चला था।
 
Parth! It is said that in ancient times, during the war between gods and demons, the elder brothers Asuras and the younger brothers Devtas fought with each other. There was a huge war between them for Rajlakshmi for thirty-two thousand years.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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