Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.33.24: राजा! तथापि, यहाँ इन सब लोगों के मारे जाने से आपके मन में जो मिथ्या चिन्ता और दुःख हो रहा है, उसके लिए आपको प्रायश्चित करना ही उचित है। अतः आप अवश्य ही तप करें॥24॥ | mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा! तथापि, यहाँ इन सब लोगों के मारे जाने से आपके मन में जो मिथ्या चिन्ता और दुःख हो रहा है, उसके लिए आपको प्रायश्चित करना ही उचित है। अतः आप अवश्य ही तप करें॥24॥
King! However, the false worry and pain that is being felt in your mind due to getting all these people killed here, it is appropriate that you should do penance for this. So, you must do penance. ॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥