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mahabharat 12.33.23: जीव बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के जन्म लेता है और भगवान की इच्छा से अचानक नष्ट हो जाता है। यह सब देखकर शोक या हर्ष करना व्यर्थ है॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.33.23 
पुरुषस्य हि दृष्ट्वेमामुत्पत्तिमनिमित्तत:।
यदृच्छया विनाशं च शोकहर्षावनर्थकौ॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जीव बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के जन्म लेता है और भगवान की इच्छा से अचानक नष्ट हो जाता है। यह सब देखकर शोक या हर्ष करना व्यर्थ है॥23॥
 
A creature is born without any apparent cause and is suddenly destroyed by the will of God. Seeing all this, it is useless to grieve or rejoice.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)