श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.33.17 
न तस्य मातापितरौ नानुग्राह्यो हि कश्चन।
कर्मसाक्षी प्रजानां यस्तेन कालेन संहृता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
काल का कोई माता-पिता नहीं है। वह किसी पर दया नहीं करता। वही काल, जो लोगों के कर्मों का साक्षी है, आपके शत्रुओं का नाश कर चुका है। 17.
 
Time has no parents. He does not show mercy on anyone. The same time, which is the witness of the deeds of the people, has destroyed your enemies. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)