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mahabharat 12.33.16: न तो आप, न भीमसेन, न अर्जुन, न नकुल-सहदेव ही उन्हें मार सकते हैं। काल ने एक-एक करके आकर अपने नियमानुसार उन सब मनुष्यों के प्राण हर लिए हैं॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.33.16 
न त्वं हन्ता न भीमोऽयं नार्जुनो न यमावपि।
काल: पर्यायधर्मेण प्राणानादत्त देहिनाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
न तो आप, न भीमसेन, न अर्जुन, न नकुल-सहदेव ही उन्हें मार सकते हैं। काल ने एक-एक करके आकर अपने नियमानुसार उन सब मनुष्यों के प्राण हर लिए हैं॥ 16॥
 
Neither you, nor Bhimasena, nor Arjuna, nor Nakul-Sahadeva can kill them. Kaal has come one by one and taken the lives of all those mortals according to his rule.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)