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mahabharat 12.33.15: वे सम्पूर्ण राजसी धन और संसार भर में महान यश प्राप्त करना चाहते थे; किन्तु यमराज के विधान से प्रेरित होकर वे मृत्यु की गोद में चले गए॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.33.15 
कांक्षमाणा: श्रियं कृत्स्नां पृथिव्यां च महद् यश:।
कृतान्तविधिसंयुक्ता: कालेन निधनं गता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे सम्पूर्ण राजसी धन और संसार भर में महान यश प्राप्त करना चाहते थे; किन्तु यमराज के विधान से प्रेरित होकर वे मृत्यु की गोद में चले गए॥15॥
 
He wanted to attain complete royal wealth and great fame throughout the world; But inspired by Yamraj's law, they have gone into the lap of death. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)