Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.33.14: व्यासजी बोले, "हे राजन! हे क्षत्रियों के शिरोमणि! क्षत्रिय धर्म का बार-बार स्मरण करके आप शोक न करें, क्योंकि ये सभी क्षत्रिय अपने धर्म के अनुसार ही मारे गए हैं॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
मा विषादं कृथा राजन् क्षत्रधर्ममनुस्मरन्।
स्वधर्मेण हता ह्येते क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभ॥ १४॥
अनुवाद
व्यासजी बोले, "हे राजन! हे क्षत्रियों के शिरोमणि! क्षत्रिय धर्म का बार-बार स्मरण करके आप शोक न करें, क्योंकि ये सभी क्षत्रिय अपने धर्म के अनुसार ही मारे गए हैं॥14॥
Vyasa said, "O King! O head of Kshatriyas! Do not feel sad by repeatedly remembering the Kshatriya Dharma, because all these Kshatriyas have been killed according to their Dharma. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥