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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 33: व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए कालकी प्रबलता बताकर देवासुरसंग्रामके उदाहरणसे धर्मद्रोहियोंके दमनका औचित्य सिद्ध करना और प्रायश्चित्त करनेकी आवश्यकता बताना
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श्लोक 11
श्लोक
12.33.11
यद् वयं सुहृदो हत्वा कृत्वा पापमनन्तकम्।
नरके निपतिष्यामो ह्यध:शिरस एव ह॥ ११॥
अनुवाद
अपने मित्रों को मारकर हमने ऐसा पाप किया है जिसका प्रायश्चित नहीं किया जा सकता; इसलिए हमें अवश्य ही नरक में गिरना पड़ेगा ॥11॥
By killing our friends we have committed a sin which cannot be atoned for by atonement; therefore we will surely have to fall headlong into hell. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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