Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.329.7: पापकर्मों से दूर रहना, सदैव पुण्यकर्म करना, सज्जनों जैसा आचरण करना और सदाचार का पालन करना - यही उत्तम कल्याण की प्राप्ति का साधन है ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पापकर्मों से दूर रहना, सदैव पुण्यकर्म करना, सज्जनों जैसा आचरण करना और सदाचार का पालन करना - यही उत्तम कल्याण की प्राप्ति का साधन है ॥7॥
To stay away from sinful acts, to always perform pious deeds, to behave like noble men and to follow good conduct - this is the means to attain the best welfare. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥