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अनादिनिधनं जन्तुमात्मनि स्थितमव्ययम्॥ ५३॥
अकर्तारममूर्तं च भगवानाह तीर्थवित्।
अनुवाद
मोक्ष का उपाय जानने वाले भगवान नारायण कहते हैं कि आत्मा, आदि और अन्त से रहित, अविनाशी, अकर्ता और निराकार, इस शरीर में विद्यमान है । 53 1/2॥
Lord Narayana, who knows the solution to salvation, says that the soul, without beginning and end, indestructible, non-doer and formless, is present in this body. 53 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥