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ज्ञानेन विविधान् क्लेशानतिवृत्तस्य मोहजान्॥ ५२॥
लोके बुद्धिप्रकाशेन लोकमार्गो न रिष्यते।
अनुवाद
जो व्यक्ति ज्ञान के बल से मोहजनित अनेक प्रकार के क्लेशों से पार हो गया है, उसके लिए बुद्धि के प्रकाश से सांसारिक आचरण का कोई भी मार्ग अवरुद्ध नहीं होता।
For one who has transcended the various kinds of afflictions caused by delusion by the power of knowledge, no path of worldly conduct is obstructed by the light of the intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥